आरोपों की गूंज के बीच हरिद्वार वन विभाग का बड़ा कदम, DFO ने बैठाई निष्पक्ष जांच
कायतकर्ता आजाद अली से मांगे गए सबूत, जांच अधिकारी नियुक्त; हर आरोप की होगी तथ्य और साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल
हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग में कथित अवैध पेड़ कटान, खनन, शिकार और अन्य गतिविधियों को लेकर उठे विवाद के बीच वन विभाग ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है। प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) स्वप्निल अनिरुद्ध के निर्देश पर रुड़की उप वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें प्रत्येक आरोप की अलग-अलग जांच कर निर्धारित समय सीमा में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग ने शिकायतकर्ता आजाद अली को भी आधिकारिक पत्र भेजकर जांच में सहयोग करने और अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज, फोटो, वीडियो अथवा अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। विभाग का कहना है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही लिया जाएगा।
जारी आदेश के अनुसार जांच अधिकारी संबंधित वन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे, विभागीय अभिलेखों की जांच करेंगे और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान भी दर्ज करेंगे। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसे साक्ष्यों सहित रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। वहीं आरोप असत्य पाए जाने पर उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।
वन विभाग का कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव है, जब सभी पक्ष अपनी बात और उपलब्ध प्रमाण जांच अधिकारी के समक्ष रखें। इसी उद्देश्य से शिकायतकर्ता से भी साक्ष्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी, जबकि आरोप निराधार पाए जाने पर वास्तविक स्थिति भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाई जाएगी।
DFO स्वप्निल अनिरुद्ध के नेतृत्व में शुरू हुई इस कार्रवाई को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वन विभाग का कहना है कि वन संरक्षण से जुड़े मामलों में न तो किसी शिकायत को नजरअंदाज किया जाएगा और न ही बिना जांच किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी। हर फैसला केवल तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।