फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई से भड़के लेखपाल, 25 सितंबर से प्रमाणपत्रों का बहिष्कार👉लेखपाल संघ की प्रदेश कार्यकारिणी ने जिला देहरादून के फैसले का किया समर्थन, कहा- कूटरचित दस्तावेजों के लिए लेखपालों को दोषी ठहराना उचित नहीं

विनोद धीमान
देहरादून। कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए कथित फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों के मामले में लेखपालों पर हुई कार्रवाई के विरोध में उत्तराखंड लेखपाल संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ की प्रदेश कार्यकारिणी ने देहरादून जिला कार्यकारिणी के उस फैसले का समर्थन किया है, जिसके तहत 25 सितंबर से सभी प्रकार के प्रमाणपत्रों के कार्य का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है।
बुधवार को लेखपाल सभागार, तहसील सदर देहरादून में प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में संघ ने साफ कहा कि यदि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी प्रमाणपत्रों के लिए लेखपालों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई तो प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में प्रमाणपत्रों के बहिष्कार का आंदोलन शुरू किया जाएगा।
रोज 50 से 100 प्रमाणपत्र, हर घर जाकर सत्यापन कैसे संभव?
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या का दबाव बेहद अधिक है। प्रत्येक लेखपाल की आईडी पर प्रतिदिन 50 से 100 तक प्रमाणपत्र आते हैं। ऐसे में प्रत्येक आवेदक के घर-घर जाकर दस्तावेजों का सत्यापन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
संघ का कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदक की ओर से अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही लेखपाल को अपनी आख्या देनी पड़ती है। दस्तावेजों में तकनीकी तरीके से छेड़छाड़ किए जाने की स्थिति में केवल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में शामिल लेखपाल को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
जन सुविधा केंद्र संचालकों और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी हो जांच
लेखपाल संघ ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उन आवेदकों के साथ-साथ जन सुविधा केंद्र संचालकों अथवा अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी सामने लाई जाए, जो कथित कूटरचित दस्तावेज तैयार करने या उनका इस्तेमाल करने में शामिल रहे हों।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि लेखपाल पहले से ही भारी कार्यदबाव में काम कर रहे हैं और कई कर्मचारियों के पास दो-दो क्षेत्रों का अतिरिक्त कार्यभार है। इसके बावजूद वे अपने दैनिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
मीडिया से भी तथ्यात्मक खबर प्रकाशित करने की अपील
बैठक में लेखपाल संघ ने मीडिया से भी पूरे प्रकरण की पड़ताल कर तथ्यात्मक खबर प्रकाशित करने की अपील की। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ समाचारों में पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी लेखपालों पर डाल दी गई, जो उनके अनुसार तथ्यात्मक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखता। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से सभी पक्षों की जानकारी लेने के बाद ही खबर प्रकाशित करने का आग्रह किया।
आंदोलन बढ़ने के संकेत
प्रदेश कार्यकारिणी ने स्पष्ट किया कि यदि लेखपालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई जारी रहती है तो आंदोलन को प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों तक विस्तार दिया जा सकता है। संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली जनसुविधा संबंधी समस्या की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
आपात बैठक में प्रदेश महामंत्री मेजर सिंह चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष मंजू बिष्ट व उम्मेद सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री रविंद्र दत्त सेमवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हुकुमचंद पाल, पूर्व जिला अध्यक्ष सगत सिंह सैनी, हीरा सिंह बिष्ट, आनंद सिंह रावत, मनोज मिश्रा, भोला सिंह, सुनील चौधरी, रिजवान हसन, हरिद्वार के जिला अध्यक्ष सुंदर सिंह तोमर, ऊधमसिंह नगर की जिला मंत्री इंदु भट्ट और देहरादून के जिला अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।